आतंकवाद और हम

पहले जब विदेशी आक्रांता भारत की भूमि पर आतंक फैलाये हुए थे तब के दृष्टिकोण व आज जब विदेशियों द्वारा भाड़े पर स्थानीय लोगोंको भड़काकर आतंक फैलाया जा रहा है तो वर्तमान दृष्टिकोण में कोई विशेष अंतर दिखलाई नहीं देता है।
१०२३ ई. में महमूद गजनी ने सोमनाथ के पवित्र मंदिर पर हमला किया था तो मंदिर के पुजारियों ने उसके सामने मूर्ति तोड़ने व बदले में मुंहमंगा धन लेने का प्रस्ताव रखा था परन्तु महमूद ने अट्टाहास करते हुए कहा था कि वह बुत फरोश नहीं है बल्कि बुत शिकन है और यह कहते हुए उसने प्रतिमा के टुकड़े कर दिये थे एवं मंदिर की अकूत सम्पदा को लूट लिया गया था। हिन्दूओं ने उस समय एकजुट होकर लुटेरे महमूद का सामना नहीं किया था और उसके बाद तो जैसे उसके मुंह में खून ही लग गया था जिससे प्रेरित होकर उसने कुल १७ बार भारत पर आक्रमण किया और उसका सामना प्रभावपूर्ण तरीके से एकजुट होकर न जब किया था और न ही आतंकवादियों के विरूद्ध आज किया जा रहा है। आज भी आतंकवादी देश के विभिन्न स्थानों पर, मंदिरों पर हमले कर रहे हैं। केन्द्रीय गृह मंत्रालय ने स्वीकार किया है कि १९९० और २००६ के बीच १६ वर्ष में मुस्लिम बाहुल्य कश्मीर घाटी में ४०,००० लोग आतंकवाद के शिकार हुए हैं तथा १७० से अधिक मंदिरों को नष्ट व भ्रष्ट किया गया है। इससे यह निष्कर्ष निकाला जा सकता है कि ७१२ ई. में मोहम्मद बिन कासिम के सिंध पर हमले के बाद से मंदिरों के विध्वंस का जो क्रम चालू हुआ था वह आज भी थमा नहीं है।
तब के आक्रमणकारियों का मुख्य उद्देश्य मंदिरों व मूर्तियों को तोड़ना, हिन्दुओं का कत्लेआम कर उनकी बहू व बेटियों की इज्जत लूटकर उनमें हीन भावना जाग्रत करना, उनके पवित्र धर्मग्रन्थों को जलाना व देश की अकृत धन सम्पदा को लूटकर इस्लाम का परचम फहराना था। यही सब उद्देश्य आज के आतंकवादियों के भी है, जो जेहाद के नाम पर अपनी आतंकवादी गतिविधियों को अंजाम देते हैं। भारत सरकार व भारत के देशवासियों ने आतंकवाद से लड़ने की अपनी नीति को परिभाषित नहीं किया है। अफसोस यह है कि सरकार अभी गंभीरता से आतंकवाद व अलगावाद से लड़ने का मन इसलिए नहीं बना पा रही हैं क्योंकि उसके सामने चुनावों से सत्ता प्राप्ति के लिए मुस्लिम तुष्टिकरण का महत्वपूर्ण मुद्दा रहता है। तभी सरकार आतंकवाद को न तो परिभाषित ही कर पा रही है और न ही उसके विरूद्ध लड़ने की कोई रीति-नीति व कार्ययोजना बना सकी है। देश के वर्तमान मंदिर, वैज्ञानिक संस्थान, परमाणु संयंत्र, बड़े-बड़़े बांध, आथिक शक्ति के प्रतीक चिन्ह, हमारे कल-कारखाने, भीड़भाड़ के स्थल और रेलों इत्यादि को लक्ष्य करके उनका विध्वंस किया जा रहा हैं। सरकार परमाणु संस्थानों पर बढ़ते खतरे की बात को स्वीकार भी कर चुकी है परन्तु आतंकवाद के प्रभावपूर्ण तरीके से लड़ने के लिए सरकार ने अपनी पुलिस, सेना व सुरक्षा बलों के हाथ बांध रखे हैं। भारतीय जनता भी महमूद गजनी के युग की तरह आज भी एकजुट होकर सरकार पर आतंकवाद व अलगावाद को रोकने के लिए कोई दबाव नहीं बना पा रही है क्योंकि सरकार व अन्य राजनैतिक दलों ने देश की जनता को क्षेत्र, जाति, धर्म, लिंग व अन्य अनेक आधारों पर विखण्डित कर रखा है। भारत लगभग ५० वषो से आतंकवाद के प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से जूझ रहा है। भारत में आतंकवाद से लड़ने के लिए कोई प्रभावी कानून ही नहीं है। एक पोटा था जो मुस्लिम तुष्टिकरण की भेंट पहले ही चढ़ चुका है। अनलॉफुल एक्टिविटीज जिसकी सरकार दुहाई देती है, एक बेहद ही लचर कानून है जिससे पुलिस व अर्द्धसैनिक बलों का मनोबल गिर रहा है। आतंकवाद घटना होने पर हमारे राजनेता मात्र यही रटारटाया जवाब देते हैं कि हम आतंकवादियों से सख्ती से निपटेंगे और भारतीय जनता को आधुनिक हथियारों से लैस आतंकवादियों के सामने ऐसे डाल देते हैं जैसे कि शेर के सामने मेमने को। अब यह लगभग स्पष्ट हो चुका है कि जेहादी आतंकवादी संगठन तीन चरणों में अपने लक्ष्य की प्राप्ति करना चाहते हैं प्रथम चरण में वे जम्मू व कश्मीर को मुक्त कराना चाहते हैं। द्वितीय चरण में हैदराबाद व जूनागढ़ को हिन्दुओं के कथित आधिपत्य से छीनना चाहते हैं और तुतीय चरण में अन्य प्रदेशों के मुसलमानों को आजाद कराना चाहते हैं। इन आतंकवादी संगठनों का मानना है कि भारत, पाकिस्तान व बांग्लादेश में विश्व के ४५ प्रतिशत मुसलमान रहते हैं, इन सभी को मिलाकर दक्षिण एशिया में एक इस्लामिक राज्य की स्थापना होनी चाहिए। इसके लिए ही आतंकवादी संगठन भारत में एक भयानक स्थिति उत्पन्न करने की निरंतर कोशिश कर रहे हैं। अलकायदा के जवाहिरी ने हिन्दुओं के प्रति तो कुछ बोला नहीं है अपितु जम्मू व कश्मीर को आजाद करने की व पाकिस्तान के राष्ट्रपति मुशर्रफ पर हिन्दुओं से सांठ-गांठ करने का आरोप लगाया है। अलकायदा ने प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से भारत में आतंकवाद फैलाने के लिए कई संगठन खड़े किए हुए हैं, जिसमें लश्कर-ए-तोयबा, हरकत उल मुजाहिदीन, हरकत उल जेहाद इस्लामी, जैश-ए-मोहम्मद इत्यादि है। भारत में अलकायदा का नेटवर्क सभी राज्यों में फैल चुका है।
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1 comments: on "आतंकवाद और हम"

manvendra said...

joshila lekh,

aage bhi aap ki lekhni ka intzar rahega.