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मुम्बई में जिहादी आतंकी हमला

मुम्बई में फिर से जोड़दार जिहादी आतंकी आक्रमण हुआ लगभग 100 से ज्यादा आदमीयों को जिहादीयों ने मार गिराया। इस घटना ने पुरे देश के समझदार आदमीयों को शायद झकझोड़ कर रख दिया। लेकिन मेरा कुछ अलग ही चिन्ता है।

मेरा पहला चिन्ता हिन्दुस्तान के प्रधानमंत्रीयों श्री मनमोहन सिंह जी को लेकर है। अगर कोई आतंकवादी जिन्दा बच गया तो बेचारे प्रधानमंत्री को रात भर निन्द नही आयेगा। 6 महीना के अन्दर जिहादीयों ने लगभग 1000 बेगुनाह आदमीयों को मार गिराया हमारे प्रधानमंत्री को इस का चिन्ता नही है। लेकिन काग्रेस ने कसम खा रखा है कि इस देश से वे जिहादीयों के खिलाफ किसी तरह का कारवाही नही करेंगे काग्रेस आतंकवादी निरोधक कानून नही लागु करेगा चाहे जिहादीयों के द्वारा कितना भी खून बहाया दिया जाये। क्यों कि मुस्लमानों के द्वारा दिये गये वेट बैंक खिसकने का डर है। ये भी सोचने लायक बात है आखिर मुस्लमान यैसी ही राजनितीक पार्टीयों को ही अपना सर्मथन क्यों देतें हैं जो आतंकवाद के खिलाफ नरम भाव रखतें हैं कई मुस्लमानों को हमेंशा से यही चिन्ता रहती है कि हिन्दुस्तान के सभी मुस्लमान आतंकवादी नही है तो फिर मुस्लमानों आमंकवादीयों से का इस तरह का प्रेमभाव क्यों। हम तो प्रधानमंत्री से मांग करते हैं कि संविधान में संसोधन करके महीना में 4दिन निश्चित कियों जायें जिस दिन आतंकवादी देश के किसी भी हिस्से में खुलेआम कत्ले आम मंचा सकते हैं उन्हें किसी तरह का कोई पुलिस के द्वारा रोक-टोक ना किया जाय। क्यों की हमारे देश के नेतो में आंतकियों को रोकने का शक्ति नही है ये अपना सारा शक्ति निर्दोश हिन्दुओं को आंतकवादी सिद्ध करनें में लगा दिये है।

दुसरा चिन्ता कांग्रेस सरकार के मानव संसाधन मंत्री श्री अर्जुन सिंह जी को लेकर है इस वाटला हाउस में जिहादीयों का सख्या कम था उनका केश लडने के लिये 1-2 वकिल से काम चल जाता लेकिन यहाँ मुम्बई में तो आतंकियों का संख्या ज्यादा कांग्रेस सरकार के मानव संसाधन मंत्री श्री अर्जुन सिह जी को तो इनका केस लड़ने के लिये ज्यादा वकिल का इंतजाम करना होगा। और तो और पैसा भी ज्यादा लगेगा लेकिन मुझे पैसे का चिन्ता नही है नेताओं के पास पैसा का कोई कमी नही रहता है हिन्दुस्तान के नेताओं के चलते तो स्विस बैक इतना फल फुल रहा है। नही तो इस मंदी की मार में स्विस बैंक भी बन्द हो गया होता। जिस तरह से मुम्बई में आतंकी घटना हुआ है आंतकीयों का सख्या लगभग 15 से 20 लगभग होगा अब इतने आंतकवादीयों के लिये वकिल भी ज्यादा चाहिये। कांग्रेस सरकार के मानव संसाधन मंत्री श्री अर्जुन सिंह को एक मुफ्त का सजेशन देता हू अगर वकील कम पड जाये तो वे अपने ही पार्टी के नेताओं का सेवा ले सकतें है आखिर घर बाले कभी तो काम में आने चाहीये।

तीसरा चिन्ता श्री शिवराज पाटील के बारे में हैं रहने दो इनके बारें में सोचना ही बेकार है अभी कही व्यस्त होगें अपना कपडा सिलवाने या धुलवानें में या फिर अपना पुराना पेपड़ खोजने में जिसमें अनका पिछला व्यान छपा था क्यों कि कुछ देर में हिन्दुस्तान के सबसे तेज चैनल के तेज पत्रकार तेजगती से श्री शिवराज पाटील जी का ब्यान लेने आ जायेगा। मेरा मुफ्त का सजेशन तेज चैनलों के बारें में क्यों अपना समय बर्बाद करते हो तेज पत्रकारों श्री शिवराज पाटील जी का पुराना रिकार्डीग निकालो कमप्यूटर के द्वारा उन्हें आठ - दस तरह के नये कपडें पहनाओं और दिखा दो आखिर श्री शिवराज पाटील जी अभी 10-12 दिन पहले तो ब्यान दिये थी आतंकीयों के खिलाफ जब आसाम में धमाका हुआ था। अब इतना जल्दी नया ब्यान लेने का जरुरत क्या है।

चौथा चिन्ता श्री माननीय अमर सिंह जी के बारे में है इस बार उनका पैसा कुछ ज्यादा खर्च होने वाला है। आखिर आतंकवादीयों के सच्चे हित्तैसी इस देश में कोई है तो वे हैं श्री अमर सिंह उन्हे आतंकवादीयों का हमेंशा से ख्याल रहता हैं। आंतकवादीयों के परिवार वालें के लिये उनकी पार्टी समाजवादी पार्टी में जिलाध्यक्ष का पद रिजर्व रहता है। और अगर सुरक्षाबल के ना-समझी के कारण कोई आंतकी मारा गया तो श्री अमर सिंह जी है उन पुलिस वाले के खैर खबर लेने के तैयार रहतें है और आतंकवादीयों का परिवार वालें को देने के लिये श्री अमर सिंह जी ने का फंड है 10 लाख रुपये। लेकिन इस बार शायद आतंकी मदद फंड का पैसा कुछ घटाना होगा क्यों कि आंकवादीयों का सख्या वाटला हाउस से ज्यादा है अगर मुम्बई में आतंकियों का संख्या 15 से 20 रहा तो सोच सकते है कि अमर सिंह जी का कितना पैसा इस बार खर्च होगा 1 करोड से ज्यादा। मेरा मुफ्त का सजेशन श्री आतंकी रक्षा मंच के सस्थापक श्री अमर सिह जी के लिये माननिय अमर सिंह जी इस बार क्यों न इस बार इन आतकीयों के परिवार वालों को गलत साइन किया हुआ चेक दे दिया जाये। क्यों की चेक तो आपके सामने कोई बैंक में डालेगा नही कुछ दिन बाद डालेगा तब तक हिन्दुस्तान के सभी मुस्लमानों के बीच ये खबर तो पहूच ही जायेगा कि आपने आतंकवादीयों को 10 लाख का सहायता प्रदान किया वैसे भी आपको चेक पर गलत साईन करने का आदत तो है मुस्लमानों का वोट आपके लिये भी पक्का साला देश जाये भाड़ में।

मेरा अंतीम चिन्ता बहुत ही तेज मिडीया वालों के लिये है कम से कम दो दिन तक इन बेचारे क्या करेंगे मुझे समझ नही आ रहा है क्यों कि रात के 9 से 10 बजे का समय तो कम से कम दो दिन के लिये ही सही मुम्बई धमाकों पर घरीयालि आँसु तो बहायेंगे । हिन्दु धर्म गुरु को गरीयाने के लिये दो दिन का झुट्टी मिल गया इन्हें।

पाढ़को आपका भी कोई चिन्ता होगा तो निचे कामेंन्ट में लिख दिजीयें
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हिन्दु आतंकवादी कंलक धोने की कवायत

पिछले काफी समय से कांग्रेसी, वामपंथी और सत्ता में उनके साथी इस जुगाड़ में थे कि उनके मुख से आतंकवादियों के समर्थक और उनके प्रति नरम रूख अपनाने का कलंक कैसे मिटे? २९ सितम्बर को हुए मालेगांव कांड में कुछ हिन्दू के उपर आरोप मंढ कर हिन्दु संगठन को बदनाम करने का साजिश रचा गया और साजिश के घेरे में सम्पूर्ण संघ परिवार को ले लिया है। सच तो यह है कि गत पांच साल के कांग्रेस और वामपंथियों के शासन में सैकड़ों विस्फोट हुए,
हिन्दू की बात बोलने वाला हर संगठन उन्हें भारत को मुस्लिम और ईसाई देश बनाने की राह में बाधा लगता है
पर एक भी अपराधी का सजा नहीं दी जा सकी। सिमी, इंडियन मुजाहिदीन आदि मुस्लिम आतंकी गिरोहों के सैकड़ों लोग पकड़े गये हैं अफजल जैसे आतंकवादीयों को न्यायलय से फांसी की सजा मिलने के बावजूद अफजल को बचाया जा रहा है। ऎसे सैकडों मुस्लिम आतंकवादी आज हिन्दुस्तान में खुले आम घुम रहें हैं इन पर कार्यवाही होना तो दूर इन्हें कुछ राजनीतिक पार्टी अपने पार्टी में सम्मलित कर देश का भाग्यविधाता बनाने का सपना देख रहा है, इतना ही नही अपनी जान गंवाकर इन्हें पकड़ने वालों पर ही संदेह किया जा रहा है। लालू, मुलायम, शिवराज पाटिल, रामविलास आदि भूलते हैं कि वे इन सुरक्षाकर्मियों के कारण ही सुरक्षित हैं। इसके बाद भी इन पर झूठे आरोप लगा रहे हैं। मुस्लिम वोट के लालच में आतंकियों के समर्थन का अगला चरण है हिन्दू संस्थाओं को कोसना। हर भगवा वेशधारी उन्हें कूपमंडूक और देशद्रोही नजर आता है। हिन्दू की बात बोलने वाला हर संगठन उन्हें भारत को मुस्लिम और ईसाई देश बनाने की राह में बाधा लगता है इसलिए उन्हें गाली दिये बिना उनका खाना हजम नहीं होता। ये हिटलर के प्रचार मंत्री गोयबल्स के कलियुगी चेले हैं। उसका मत था कि यदि झूठ को सौ बार बोलें, तो वह सच हो जाता है। उसकी दूसरी मान्यता यह भी थी कि झूठ इतना बड़ा बोलो कि घोर विरोधी भी उसका दस-बीस प्रतिशत तो सच मान ही ले। उनका यह रैवया सदा से रहा है। गांधी जी के हत्यारे नाथूराम ने स्पष्ट कहा था कि यक काम उसने अपनी इच्छा से किया। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का इसमें कोई हाथ नहीं है। न्यायालय ने भी संघ को निर्दोष पाया, नेहरू सरकार ने ही संघ से प्रतिबंध हटाया। फिर भी आज तक संघ को उस हत्याकांड में घसीटा जाता है। कई लोगों को इस कारण न्यायालय में माफी मांगनी पड़ी है, फिर भी वे अपने झूठ पर डटे हैं।
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