15 अगस्त आने बाला है। हमारे दिल में 15 अगस्त को फिर से देशभक्ती कि ज्वार हिलोड मारेंगा। वैसे साल में सिर्फ दो दिन हमारे दिल में देशभक्ति का रसधारा वहता है वह है 15 अगस्त और 26 जनवरी। हमारे देश में ये दो दिन रिर्जव रखा गया है देशभक्ति के लिये और सब दिन सब चलता है। देश को आजाद हुये 62 साल हो गये अब हमें सोचना चाहिये कि क्या हम सही मायने में आजाद हैं
हमारे देश में सभी को खुला छुट मिला है अपने आजादि के मानने के लिये। चाहे कुछ भी करें कोई बोलने बाला नही कोई टोकने बाला नही क्यों कि हम आजाद हैं। शहर में तीन - चार बम फटा तो रिस्तेदार मरें उनकों छोड़ कर हम देश वासियों को सिर्फ दो पल के लिये रोष आता है उसके बाद सब नार्मल हो जाता हैं यैसा लगता है जिस शहर में बम फटा वह हमारे देश में नही है किसी और देश में हैं। अगर कोई पकराया तो सरकार के द्वारा केस करने से पहले मानवाधिकार बालें आतंकियों को बचाने के लिये वकिल कर लेते हैं। घटना स्थल पर नेता आते हैं कडे़ शब्दों में निन्दा करतें हैं आतंक को जड़ से खत्म करने का कसम खातें हैं भविष्य में इसका पुनरावृति ना हो इसका वचन देतें हैं नतिजा कुछ दिन बाद फिर से बम विस्फोट। सब भगवान भरोसा क्यों कि हम आजाद हैं।
जब हमारे देश में अंग्रेज थे तब हमारे देश में हर 44 मिनट में एक बलात्कार होता था अब हम जब आजाद हो गयें तो हर 22 मिनट में एक बालात्कार होता हैं। जब अंग्रेज थे तो हर 100 बालात्कारी में से सिर्फ 5 बालात्कारी को सजा मिलता था अब सिर्फ 7 को सजा मिलता हैं क्यों कि हम आजाद हैं। आज के तारिख में हर 3 मिनट में हिन्दुस्तान में किसी ना किसी लड़कियों के छेडखानी का घटना होता है। क्यों कि हम आजाद हैं। हर 12 मिनट में दहेज लोभीयों द्वारा किसी ना किसी महिला को प्रताडीत किया जाता हैं। क्यों की हम आजाद हैं।
आजादी के क्या मायने रह गयें हैं हमारे लिये। भारत माँ को डायन कहने बाले आजाद हैं भारत माँ की नंगी तस्विर बनाने बाले आजाद है। ओसामा के हम शक्ल क साथ में लेकर घुमने बाले आजाद हैं। संसद भवन में आक्रमण करने बाले आजाद है। अफजल और कसाब आजाद है। देशद्रोहियों की फौज आजाद हैं और उनके सर्मथक आजाद है। भष्टाचारी आजाद है। चोर, उच्चके आजाद है। बालात्कारी आजाद है। हमारे देश के सैनिकों को गाली देने बाले आजाद है। समाजिक सदभावना के नाम पद देश को बाटने बाले आजाद है। दंगाई आजाद है। लोकतंत्र के नाम पर इस देश को लुटने बाले नेता आजाद है। आजमगढ़ में माथा टेकने बाले आजाद हैं। बाटला हाउस को धार्मिक स्थल बनाने बाले आजाद है। क्या है हमारे आजादी के जरा सोचिये।
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हमारे देश में सभी को खुला छुट मिला है अपने आजादि के मानने के लिये। चाहे कुछ भी करें कोई बोलने बाला नही कोई टोकने बाला नही क्यों कि हम आजाद हैं। शहर में तीन - चार बम फटा तो रिस्तेदार मरें उनकों छोड़ कर हम देश वासियों को सिर्फ दो पल के लिये रोष आता है उसके बाद सब नार्मल हो जाता हैं यैसा लगता है जिस शहर में बम फटा वह हमारे देश में नही है किसी और देश में हैं। अगर कोई पकराया तो सरकार के द्वारा केस करने से पहले मानवाधिकार बालें आतंकियों को बचाने के लिये वकिल कर लेते हैं। घटना स्थल पर नेता आते हैं कडे़ शब्दों में निन्दा करतें हैं आतंक को जड़ से खत्म करने का कसम खातें हैं भविष्य में इसका पुनरावृति ना हो इसका वचन देतें हैं नतिजा कुछ दिन बाद फिर से बम विस्फोट। सब भगवान भरोसा क्यों कि हम आजाद हैं।
जब हमारे देश में अंग्रेज थे तब हमारे देश में हर 44 मिनट में एक बलात्कार होता था अब हम जब आजाद हो गयें तो हर 22 मिनट में एक बालात्कार होता हैं। जब अंग्रेज थे तो हर 100 बालात्कारी में से सिर्फ 5 बालात्कारी को सजा मिलता था अब सिर्फ 7 को सजा मिलता हैं क्यों कि हम आजाद हैं। आज के तारिख में हर 3 मिनट में हिन्दुस्तान में किसी ना किसी लड़कियों के छेडखानी का घटना होता है। क्यों कि हम आजाद हैं। हर 12 मिनट में दहेज लोभीयों द्वारा किसी ना किसी महिला को प्रताडीत किया जाता हैं। क्यों की हम आजाद हैं।
आजादी के क्या मायने रह गयें हैं हमारे लिये। भारत माँ को डायन कहने बाले आजाद हैं भारत माँ की नंगी तस्विर बनाने बाले आजाद है। ओसामा के हम शक्ल क साथ में लेकर घुमने बाले आजाद हैं। संसद भवन में आक्रमण करने बाले आजाद है। अफजल और कसाब आजाद है। देशद्रोहियों की फौज आजाद हैं और उनके सर्मथक आजाद है। भष्टाचारी आजाद है। चोर, उच्चके आजाद है। बालात्कारी आजाद है। हमारे देश के सैनिकों को गाली देने बाले आजाद है। समाजिक सदभावना के नाम पद देश को बाटने बाले आजाद है। दंगाई आजाद है। लोकतंत्र के नाम पर इस देश को लुटने बाले नेता आजाद है। आजमगढ़ में माथा टेकने बाले आजाद हैं। बाटला हाउस को धार्मिक स्थल बनाने बाले आजाद है। क्या है हमारे आजादी के जरा सोचिये।