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यह धर्मनिर्पेक्ष बस्ती हैं यहाँ थूकना मना है

क्या आप धर्मनिर्पेक्ष हैं क्या धर्मनिर्पेक्षता का पालन करतें हैं नही तब तो आप पर धिक्कार है।

गुजरात के दंगा पीडित का सहायता करना धर्मनिर्पेक्षता है और काश्मीर से निकाले गये हिन्दुओं का मदद करना साम्प्रदायिकता है।

लक्ष्मणानन्द सरस्वती का हत्या साम्प्रदायिकता का खात्मा, ग्राहम स्टेन्स का हत्या धर्मनिर्पेक्षता का हत्या।

मन्दिर तोड़ कर बाबरी मस्जिद बनाना धर्मनिर्पेक्षता है राम मन्दिर के बारे में सोचना साम्प्रदायिकता। क्यों राम मन्दिर में हिन्दु पुजा करने जाते हैं

अमरनाथ यात्रा साम्प्रदायिक है और हज में सब्सीडी देना धर्मनिर्पेक्षता है। अमरनाथ यात्रा से मुस्लमानों के धार्मिक भावना आहत होता है काश्मीर को दारुल इस्लाम बनाने में दिक्कत आता है इस लिये अमरनाथ यात्रा साम्प्रदायिक

सरस्वती शिशु मन्दिर साम्प्रदायिकता फैलाने बाला स्कूल है क्यों कि वहाँ वन्देमातरम गाया जाता है वहाँ हिन्दुस्तान के गैरवशील इतिहास के बारे में पढाया जाता है इस लिये सरस्वती शिशु मन्दिर साम्प्रदायिक है और मदरसा जहाँ आंतक और जिहाद का शिक्षा मिलता है वह धर्मनिर्पेक्ष है।

विकास पुरुष नरेन्द्र मोदी साम्प्रदायिक, बाटला हाउस आजमगढ़ में माथा टेकने बाले, आतंकवादीयों के परिवार को पैसा देने बाले नेता गण धर्मनिर्पेक्ष|

हिन्दु साम्प्रदायिक है और मुसलमान धर्मनिर्पेक्ष है रामनवी का जुलुस साम्प्रदायिक, भरतपुर में भरत मिलन समारोह साम्प्रदायिक मन्दिर में पुजा करना साम्प्रदायिकता , मन्दिर में भजन कीर्तन करना साम्प्रदायिक और मुसलमानों के द्वारा शुक्रवार को बीच रोड में नमाज पढ़ना धर्मनिर्पेक्षता हैं भरत मिलन समारोह में दंगा करना धर्मनिर्पेक्षता है। दिन में पाँच - पाँच बार लाउडसपिकर लगा कर नमाज पढ़ना धर्मनिर्पेक्षता है, मुहरर्म का जुलुस में हथियार का प्रर्दशन करना धर्मनिर्पेक्षता है।

वरुण गाँधी - पक्का साम्प्रदायिक है उसमें एक नही दो-दो ऎसा गुण है जो वरुण गाँधी को साम्प्रदायिक सिद्ध करता है एक उसका नाम वरुण जिसका अर्थ है हिन्दु के देवता सुर्य और दुसरा हिन्दु की रक्षा का बात करना का गलती, राहूल गाँधी धर्मनिर्पेक्षता का पक्का सिपाही किसी को कोई शक है क्या।

साध्वी प्रज्ञा सिंह साम्प्रदायिक-अफजल गुरु, कसाब, जिहादी आंतकी धर्मनिर्पेक्षता के पुजारी हैं।

देशहित के नाम पर रामसेतु तोड़ना धर्मनिर्पेक्षता है सड़क चौडा, रेलवे स्टेशन विस्तार के लिये किसी मस्जिद या मजार को स्तान्तरण करना घोर साम्प्रदायिकता है ।

सुरेश चिपलुनकर, प्रमेन्द्र प्रताप, संजय बेंगाणी, चन्दन जैसे ब्लागर ये सभी पक्के साम्प्रदायिक है इन सभी का चेहरा-मोहरा, हाव भाव, चाल चलन, रहन सहन, इनका कम्युटर, माउस, किबोर्ड, वायरस सब साम्प्रदायिकता है।

भाजपा साम्प्रदायिक और मुस्लिम लीग धर्मनिर्पेक्ष है क्यों की मुस्लिम लीग अल्पसंख्यकों की पार्टी है अल्पसंख्यक कभी भी साम्प्रदायिक नही होता है, देश भाजपा जैसा साम्प्रदायिक पार्टी तोड़ता है मुस्लिम लीग जैसा अल्पसंख्यक का पार्टी कभी भी देश नही तोड़ता है। क्या आज तक किसी ने सुना है मुस्लिम लीग ने पाकिस्तान बनाया है नही ना हमेशा से यही सुनने में आता है कि भाजपा देश तोड़क पार्टी है ( लेकिन शायद किसी को नही पता होगा कि भाजपा ने कौन सा देश या किसका देश तोडा़ है पाकिस्तान बनने के समय तो भाजपा था भी नही)

शिवाजी, लक्ष्मीवाई, गुरुनानक देव, बन्दा बैरागी, महाराणा प्रताप साम्प्रदायिक हैं 5000 औरतों से शादि करने बाला महान अकबर धर्मनिर्पेक्ष, 40,000 हजार हिन्दुओं को एक दिन में मौत के घाट उतारने बाला चंगेज खाँ धर्मनिर्पेक्ष, औंरगजेब धर्मनिर्पेक्ष, बाबर धर्मनिर्पेक्ष

सिमी धर्मनिर्पेक्ष बजरंग दल साम्प्रदायिक, गुजरात के ट्रेन में आग लगाना धर्मनिर्पेक्षता, आग से अपने आप को बचाना साम्प्रदायिकता, राम प्रसाद साम्प्रदायिक, लक्ष्मण प्रसाद साम्प्रदायिक, कृ्ष्ण देव साम्प्रदायिक, मोहन सिंह साम्प्रदायिक, राधिका साम्प्रदायिक, उमाशंकर साम्प्रदायिक, रमाकान्त साम्प्रदायिक, गणेश साम्प्रदायिक, गैरी साम्प्रदायिक, राधा साम्प्रदायिक|

हिन्दु, सिख, जैन साम्प्रदायिक मन्दिर, देवालय, गुरुद्वारा साम्प्रदायिक, मुस्लिम, इसाई धर्मनिर्पेक्ष मस्जिद, चर्च धर्मनिर्पेक्ष, जय श्री राम साम्प्रदायिकता, नमस्कार साम्प्रदायिक, प्रणाम साम्प्रदायिक, सुर्य नमस्कार साम्प्रदायिक, बाबा रामदेव साम्प्रदायिकता, योग साम्प्रदायिक।

हम साम्प्रदायिक आप धर्मनिर्पेक्ष !!! जय श्री राम !!!
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कांग्रेस सरकार का नाटक

कांग्रेस सरकार राष्ट्रीय एकता परिषद के मंच का राजनीतिक दुरुपयोग कर रहा है। यह राष्ट्रीय एकता का ढकोसला है। विगत सप्ताह एकता परिषद की दिल्ली में हुई बैठक के एजेंडे से ही यह झलक मिल रही थी कि यह बैठक बजरंग दल और विश्व हिन्दू परिषद को घरने के दुराग्रह के साथ आयोजित की जा रही थी क्योंकि आज देश के सामने जो सबसे गंभीर संकट है अर्थात आतंकवाद, वह इस बैठक के एजेंडे में ही नहीं था। बल्कि उड़ीसा और कर्नाटक की हिंसक घटनाओं के परिप्रेक्ष्य में साम्प्रदायिकता को बैठक का केन्द्रीय विषय बनाया गया। यह स्पष्ट है कि परिषद की यह बैठक आगामी चुनावों को ध्यान में रखकर साम्प्रदायिकता के नाम पर हिन्दुत्वनिष्ठ संगठनों और भाजपा को आरोपित कर छद्म सेकुलर जमात अल्पसंख्यक समुदायों को यह संदेश देना चाहती थी कि वही उनकी हिमायती है। बजरंग दल के खिलाफ स्वर को मुखर करने के लिए समाजवादी पार्टी के महासचिव अमर सिंह को परिषद का सदस्य मनोनीत किया गया जबकि अमर सिंह ने आतंकवादियों के खिलाफ पुलिस मुठभेड़ में शहीद हुए पुलिस अधिकारी शहादत पर ही प्रश्न चिन्ह लगा दिया था। अमर सिंह जैसे लोगों को परिषद में शामिल कर सरकार क्या संदेश देना चाहती है। इस बैठक की गंभीरता का अनुमान इसी से लगाया जा सकता है कि बैठक में विशष आमंत्रित के रूप में बुलाए गए कामरेड ज्योति बसु ने स्वयं उपस्थित न होकर अपना जो संदेश भेजा वह परिषद की कार्यशैली व भूमिका पर प्रश्नचिन्ह लगाता है। भाजपा द्वारा आतंकवाद जैसे गंभीर विषय को बैठक के एजेंडे में शामिल करने के लिए जोर देने पर सरकार ने चरम पंथ को एजेंडे में शामिल किया क्यों कि संप्रग सरकार व उसके छद्म धर्मनिरपेक्ष घटक दल जानते हैं कि आतंकवाद पर व्यापक बहस हुई तो उन सबकी पोल खुलेगी और फिर देश की जनता जानेगी कि सोनिया पार्टी की सरकार और लालू,पासवान व मुलायम सिंह जैसे उसके सहयोगी किस तरह मुस्लिम तुष्टीकरण के लिए न केवल आतंकवाद के खिलाफ कड़े कदम उठाने से कतरा रहे हैं बल्कि आतंकवादी समूहों के पैरोकारी कर रहे हैं।
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देश हित्त के लिय अब जग जाओ

आज सेकुलर नेता गला फाड़ कर चिल्लये जा रहें हैं बजरंग दल और विश्व हिन्दु परिषद पर पाबन्दी लगे। कारण सिर्फ और सिर्फ एक है मुस्लिम तुष्टीकरण और कोई कारण नही है। सिमी के उपर बैन लगा है। आतंकवादि संस्था इन्डियन मुजाहिदीन को बैन किया गया है। बस अब चुनाव आ गया है अब जयचन्दी नेता को अपने भाई बन्धु के सामने मुहँ दिखाना है बेचारे जयचन्दी नेता क्या मुहँ लेकर जामा मस्जिद से फतवा जारी करवायेगे, हिन्दुस्तान के मस्जिद आजादी के पहले से देशविरोधी गतिवीधी में लगा है और आज भी है। जामा मस्जिद के मैलाना समय समय पर यह ऎहसास दिलवा देता है यह कह कर हम आईएसआई के ऎजेन्ट है। किसी पकरे गये आतंकवादि के घर पर जाकर हिन्दुस्तान के पुलिस और आतंक के सर्मथन में भाषण देकर आता है। और उपर के कहता है किसी में हिम्मत है तो पकर के दिखाये। लेकिन जयचन्दी नेता को अगर चिन्ता है तो सिर्फ वोट का। देश जाये भाड़ में जयचन्दी नेता वोट लिये जितना निचे गिर सकते है गिर जायेगा अपना फेका थुक तक चाटने को तैयार रहता है।

84 साल के हिन्दु साधु लक्ष्मणा नन्द सरस्वति को बेरहमी से मार डाला गया इसमें कोई सक नही की इसमें चर्च का हाथ है। चर्च के पादरी इस बात को मानते है लेकिन जयचन्दी नेता इस बात को मानने को तैयार नही है कि लक्ष्मणा नन्द को पादरीयों ने मरवाया है। लेकिन किसी जयचन्दी नेता में इतना हिम्मत नही था कि खुल कर कह सके कि बुढे़ धर्म गुरु को मारना अपराध है।

लक्ष्मणा नन्द सरस्वति को मरने कि खुशी में चर्च ने विजय उत्सव मनाया जगह जगह हवा में गोली चला कर खुशी मनाया गया। मिशनरी के 2500 स्कूल इस खुशी में सामिल हो गये और 1 दिन के लिये स्कूल बन्द रखा। स्कूल में पढ़ने बाले लाखो हिन्दु छात्र को भी इस खुशी में सामिल किया गया। किसी हिन्दु के द्वारा इसका विरोध किया गया। जब सिर्फ कंधमाल के हिन्दु द्वारा स्वामी जी के हत्या का विरोध किया गया तो इटली, फ्रास, अमेरिका तक को फटने लगा हिन्दुस्तान में रह रहे अपने ऎजेन्टों के द्वारा चिल्लम पो मचाना सुरु किया लेकिन स्वामी लक्ष्मणा नन्द सरस्वति के हत्या के विरोध में कितना स्कूल बन्द किया गया। कितने ऎसे नेता हैं जो विरोध किये। आखिर कारण क्या है। हम संगठित नही है हम में एकता नही है जिसके कारण जाने अनजाने में जयचन्दीयों का हम मदद कर रहें है। देश हित्त के लिय अब जग जाओ
* जयचन्द - पृ्थ्विराज चैहान का भाई जिसके दगाबाजी कारण पृथ्विराज चैहान लडा़ई में हारा और कैद में रह कर अपना जान दिया
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