बधाई हो अर्जुन सिंह जी कुछ आतंकवादि और आने बाले हैं जिसका आप कानून के द्वारा बचाव कर सकते हो। दिल्ली में कल सिर्फ एक ही विस्फोट किया गया। और 10-12 आदमी फिर मारे गये। शायद सभी मजदुर थे और सिमी के ब्लाइन्ड सर्पोटर लालू यादव और रामविलास पासवान के गृह राज्य बिहार के रहने वाले थे। मुझे मेरे एक मित्र मुम्बई से फोन करके बताया कि दिल्ली में फिर से विस्फोट हुआ है। जब से मैं सुना टी.वी खोल कर बैठ गया अलग अलग समाचार चैनल पर नजर गडा़ कर देखने लगा कि आज शिवराज पाटिल जी किस तरह का ड्रेस पहन कर आते हैं और देखना चाहता था कि और कितना जगह विस्फोट हुआ है लेकिन भगवान का शुक्र है कि इस बार सिर्फ एक जगह विस्फोट हुआ। धन्यवाद तो सही में सिर्फ भगवान को देना चाहिये जिसके कारण विस्फोट का संख्या कम रहा और आदमी भी कम मरे सरकार तो आतंकवादियों का अभी तक कुछ कर नही सकी । सरकार की तरफ से अभी तक व्यान सुनने को नही मिला। शायद एक धमाका हो इस लिये शिवराज पाटिल जी ने नया कपडा पहन कर कोइ व्यान देना या फिर जरुरी नही समझा होगा क्या एक विस्फोट में व्यान दिया जाय या फिर उनके पास नया कपडा नही होगा जिसको पहन कर मिडीया के सामने आते। वैसे श्री शिवराज पाटिल जी को मिडीया के सामने आने का जरुरत भी नही है क्यों कि उनके द्वरा दिया जाने बाला व्यान लगभग सभी आदमी को याद हो गया होगा। इधर खुश तो श्री अर्जुन सिंह जी भी होगें। पुलिस बाले कुछ आतंकवादियों को जरुर पकरेंगे। और आतंकवादियों को संरक्षण का और कानूनी लडाई लड़ने के जरुरत भी होगा तो आतंकवादियों को कानूनी लडाई लडनें में मानवसंसाधन मंत्रालय किस दिन काम आयेगा आखिर आतंकवादि भी मानव ही होते है और लेकिन मरने बाले क्या होते हैं शायद किसी को पता नही...................................
अब पुलिस बाले क्या करेंगे|पुलिस क्या करेंगे इंस्पेक्टर श्री मोहन चंद्र शर्मा कि तरह अपना जान देकर आतंकवादियों को पकरें या फिर घर में आराम से सोयें। आराम से सोना ज्यादा फायदेंमन्द है। अगर कोई पुलिस आतंकवादियों के साथ मुठभेड़ में मारा गया तो क्या होगा बेचारा गया इस संसार उसका बीबी - बच्चे अनाथ और मुआबजा के लिये सालों सरकारी दफ्तर के चक्कर काटना परेगा वो अलग से। उन्हें ना कोई मुआवजा मिलेगा और ही उनका नाम लेने बाला और तो और पुलिस का कोई मानवाधिकार संघटन भी नही है जो पुलिस बालों के अनाथ भुखे बच्चों को किसी तरह का कोई मदद दिला सकें। अब हमें क्या करना है सोचों।
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अब पुलिस बाले क्या करेंगे|पुलिस क्या करेंगे इंस्पेक्टर श्री मोहन चंद्र शर्मा कि तरह अपना जान देकर आतंकवादियों को पकरें या फिर घर में आराम से सोयें। आराम से सोना ज्यादा फायदेंमन्द है। अगर कोई पुलिस आतंकवादियों के साथ मुठभेड़ में मारा गया तो क्या होगा बेचारा गया इस संसार उसका बीबी - बच्चे अनाथ और मुआबजा के लिये सालों सरकारी दफ्तर के चक्कर काटना परेगा वो अलग से। उन्हें ना कोई मुआवजा मिलेगा और ही उनका नाम लेने बाला और तो और पुलिस का कोई मानवाधिकार संघटन भी नही है जो पुलिस बालों के अनाथ भुखे बच्चों को किसी तरह का कोई मदद दिला सकें। अब हमें क्या करना है सोचों।